Close Menu
    Facebook X (Twitter) Instagram YouTube
    • Home
    • About Us
    • Contact Us
    • MP Info RSS Feed
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Narad Samvad
    • Home
    • देश
    • विदेश
    • राज्य
    • मध्यप्रदेश
      • मध्यप्रदेश जनसंपर्क
    • छत्तीसगढ़
      • छत्तीसगढ़ जनसंपर्क
    • राजनीती
    • धर्म
    • अन्य खबरें
      • मनोरंजन
      • खेल
      • तकनीकी
      • व्यापार
      • करियर
      • लाइफ स्टाइल
    Narad Samvad
    Home»राज्य»छत्तीसगढ़»दरभा, बास्तानार और तोकापाल में बस्तर पण्डुम से बिखरी लोक-संस्कृति की छटा…
    छत्तीसगढ़

    दरभा, बास्तानार और तोकापाल में बस्तर पण्डुम से बिखरी लोक-संस्कृति की छटा…

    News DeskBy News DeskJanuary 16, 2026No Comments4 Mins Read
    Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr WhatsApp Email Telegram Copy Link
    दरभा, बास्तानार और तोकापाल में बस्तर पण्डुम से बिखरी लोक-संस्कृति की छटा…
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp Pinterest Email

    रायपुर: बस्तर अंचल की आदिम संस्कृति, पारंपरिक खान-पान और रीति-रिवाजों को वैश्विक पटल पर लाने के उद्देश्य से जिले के अलग-अलग विकासखंडों में ‘बस्तर पण्डुम’ का भव्य आयोजन किया जा रहा है। जिसके तहत दरभा विकासखंड के छिन्दावाड़ा, बास्तानार के बड़े किलेपाल और तोकापाल के छोटे आरापुर में आयोजित इस उत्सव में जनसैलाब उमड़ पड़ा। इस दौरान जनप्रतिनिधियों ने बस्तर की विरासत को भावी पीढ़ी तक पहुँचाने का संकल्प लिया।

    दरभा, बास्तानार और तोकापाल में बस्तर पण्डुम से बिखरी लोक-संस्कृति की छटा

    बस्तर जिले के दरभा विकासखंड के छिन्दावाड़ा ग्राम में आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुए सांसद श्री महेश कश्यप ने कहा कि बस्तर की संस्कृति और परंपराओं को बनाने में हमारे पूर्वजों की कई पीढ़ियां लगी हैं। उन्होंने न केवल रीतियों को, बल्कि यहां के प्राकृतिक संसाधनों को भी संरक्षित किया। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि हमारी आने वाली पीढ़ी अपनी संस्कृति और पारंपरिक खान-पान को भूल रही है। पूर्व में आदिवासी संस्कृति को मिटाने के प्रयास हुए, लेकिन अब हमें अपनी परंपराओं को अक्षुण्ण रखना है और पूर्वजों की धरोहर को सहेजना हमारा परम दायित्व है।

    दरभा, बास्तानार और तोकापाल में बस्तर पण्डुम से बिखरी लोक-संस्कृति की छटा

    चित्रकोट विधायक श्री विनायक गोयल ने कहा कि आज बस्तर पण्डुम के माध्यम से हमारी खान-पान और रीति-रिवाज दुनिया के सामने आ रहे हैं। केंद्र और राज्य सरकार ने हमें एक ऐसा मंच दिया है, जिससे हमारी पहचान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिल रहा है। यह हम सभी की जिम्मेदारी है कि हम अपनी नई पीढ़ी को अपनी गौरवशाली संस्कृति से अवगत कराएं।

    जगदलपुर विधायक श्री किरण सिंह देव ने बस्तर की विविधता को रेखांकित करते हुए कहा कि यहां हर 10 किलोमीटर पर बोली, भाषा, रहन-सहन और संस्कृति बदल जाती है। पूरे विश्व की नजर आज बस्तर पर है। बस्तर ओलंपिक में 3 लाख 91 हजार पंजीयन इस बात का सबूत है कि यहां के युवा आगे बढ़ना चाहते हैं। श्री देव ने नक्सलवाद के खात्मे और विकास कार्यों में तेजी की बात करते हुए कहा कि अब बस्तर का आदिवासी जंगल में जाने से नहीं डरता। हम तेजी से देवगुड़ियों का निर्माण कर रहे हैं। हमें हिंदी और अंग्रेजी जरूर सीखनी चाहिए, लेकिन अपनी स्थानीय बोली और भाषा को कभी नहीं छोड़ना चाहिए। बस्तर की हर वनस्पति औषधीय गुणों से भरपूर है, जिस पर हमें गर्व होना चाहिए। इस अवसर पर छिन्दावाड़ा में अतिथियों का स्वागत परंपरागत रूप से किया गया। वहीं कार्यक्रम का शुभारंभ देवी-देवताओं के आह्वान के साथ किया गया।

    इस अवसर पर पारंपरिक बाजा मोहरी की धुन पर देवी देवताओं का आह्वान किया गया। अतिथियों का स्वागत धुरवा नृत्य के साथ उत्साहपूर्वक किया गया। छिन्दावाड़ा में आदिवासी संस्कृति और परंपरा का एक ऐसा अनूठा संगम देखने को मिला, जिसने छत्तीसगढ़ के बस्तर की सोंधी मिट्टी की महक से रूबरू करा दिया। ‘बस्तर पण्डुम’ के नाम से आयोजित इस भव्य कार्यक्रम की शुरुआत आस्था और विश्वास के प्रतीक माई दंतेश्वरी की पूजा-अर्चना और आंगादेव की आराधना के साथ हुई, जिसके बाद पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। पारंपरिक धुरवा नृत्य ने बस्तर की आदिम संस्कृति की ऐसी छटा बिखेरी कि दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए। लेकिन इस आयोजन का आकर्षण केवल नृत्य और संगीत तक सीमित नहीं था, बल्कि बस्तर के जंगलों का दुर्लभ स्वाद भी यहाँ प्रमुखता से छाया रहा।

    दरभा, बास्तानार और तोकापाल में बस्तर पण्डुम से बिखरी लोक-संस्कृति की छटा

    खान-पान के शौकीनों के लिए यह आयोजन किसी दावत से कम नहीं था। यहाँ बस्तर के वनों में पाए जाने वाले दुर्लभ कंद-मूलों की एक विस्तृत श्रृंखला प्रदर्शित की गई, जिसमें कोचई, तरगारिया, डेंस, कलमल, पीता, सोरेंदा, जिमी और नागर कांदा शामिल थे। इन कंदों ने जहाँ लोगों को प्रकृति के उपहारों से परिचित कराया, वहीं पारंपरिक व्यंजनों ने भी खूब वाहवाही बटोरी। जोंधरी लाई के लड्डू की मिठास और जोंधरा, मंडिया व पान बोबो जैसे पारंपरिक पकवानों का स्वाद चखकर लोग अभिभूत हो गए। गुड़ बोबो की मिठास के साथ तीखुर बर्फी और भेंडा चटनी ने भोजन प्रेमियों को एक अविस्मरणीय जायका प्रदान किया। भेंडा फूल से बने शरबत ने भी विशेष आकर्षित किया।

    स्वाद और संस्कृति के इस मेले में स्वास्थ्य और पुरानी चिकित्सा पद्धति को भी विशेष स्थान दिया गया। हड़जोड़, देव सन्ड, कामराज, काली धतूरा और कोचेल छाली जैसी औषधियों के माध्यम से वनौषधियों के महत्व को समझाया गया। इस पूरे आयोजन को सफल बनाने में बस्तर और आसपास के क्षेत्रों से आए अतिथियों का विशेष योगदान रहा। मांझीपाल के महादेव नाग ढोडरेपाल से आए कंवल सिंह एवं लखबंधु, दरभा की अमृता और कुंती तथा कावारास के चुनेश कश्यप ने यहां विभिन्न प्रकार की औषधीय पौधों का प्रदर्शन किया

    News Desk

    Related Posts

    प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण से उदेराम का पक्के मकान का सपना हुआ साकार, कच्चे घर से सुरक्षित, सम्मानजनक और स्थायी जीवन की ओर बढ़ा कदम…..

    February 9, 2026

    स्थापना दिवस विशेष : बदला सफर का मतलब, मजबूत हुई अर्थव्यवस्था, छत्तीसगढ़ के विकास को रफ्तार दे रहा एनएचएआई…..

    February 9, 2026

    एलोवेरा आधारित पर्सनल केयर उत्पादों से पहचान बना रहा दुगली का वन धन विकास केंद्र….

    February 9, 2026

    आधुनिक कृषि यंत्रों एवं उन्नत तकनीक से छत्तीसगढ़ का किसान बन रहे हैं आत्मनिर्भर….

    February 9, 2026

    केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह आज छत्तीसगढ़ के बस्तर पंडुम 2026 के समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रुप में शामिल हुए….

    February 9, 2026

    भारत की संस्कृति का आभूषण है बस्तर – केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह…..

    February 9, 2026
    विज्ञापन
    विज्ञापन
    हमसे जुड़ें
    • Facebook
    • Twitter
    • Pinterest
    • Instagram
    • YouTube
    • Vimeo
    अन्य ख़बरें

    प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण से उदेराम का पक्के मकान का सपना हुआ साकार, कच्चे घर से सुरक्षित, सम्मानजनक और स्थायी जीवन की ओर बढ़ा कदम…..

    February 9, 2026

    स्थापना दिवस विशेष : बदला सफर का मतलब, मजबूत हुई अर्थव्यवस्था, छत्तीसगढ़ के विकास को रफ्तार दे रहा एनएचएआई…..

    February 9, 2026

    एलोवेरा आधारित पर्सनल केयर उत्पादों से पहचान बना रहा दुगली का वन धन विकास केंद्र….

    February 9, 2026

    आधुनिक कृषि यंत्रों एवं उन्नत तकनीक से छत्तीसगढ़ का किसान बन रहे हैं आत्मनिर्भर….

    February 9, 2026
    हमारे बारे में

    यह एक हिंदी वेब न्यूज़ पोर्टल है जिसमें ब्रेकिंग न्यूज़ के अलावा राजनीति, प्रशासन, ट्रेंडिंग न्यूज, बॉलीवुड, खेल जगत, लाइफस्टाइल, बिजनेस, सेहत, ब्यूटी, रोजगार तथा टेक्नोलॉजी से संबंधित खबरें पोस्ट की जाती है।

    Disclaimer - समाचार से सम्बंधित किसी भी तरह के विवाद के लिए साइट के कुछ तत्वों में उपयोगकर्ताओं द्वारा प्रस्तुत सामग्री ( समाचार / फोटो / विडियो आदि ) शामिल होगी स्वामी, मुद्रक, प्रकाशक, संपादक इस तरह के सामग्रियों के लिए कोई ज़िम्मेदार नहीं स्वीकार करता है। न्यूज़ पोर्टल में प्रकाशित ऐसी सामग्री के लिए संवाददाता / खबर देने वाला स्वयं जिम्मेदार होगा, स्वामी, मुद्रक, प्रकाशक, संपादक की कोई भी जिम्मेदारी नहीं होगी. सभी विवादों का न्यायक्षेत्र रायपुर होगा

    हमसे सम्पर्क करें
    संपादक - Mohd Amir
    मोबाइल - +91 9111707573
    ईमेल - [email protected]

    कार्यालय

    छत्तीसगढ़ - Chhatrapati Shivaji Ward , Ward No.35 , Jagdalpur - 494001

    मध्यप्रदेश - 11/13, MASJID DOMNI WALI, NEAR MADINA HOTEL, IBRAHIMPURA, BHOPAL, Dist- BHOPAL
    February 2026
    M T W T F S S
     1
    2345678
    9101112131415
    16171819202122
    232425262728  
    « Jan    
    Facebook X (Twitter) Instagram Pinterest
    • Home
    • About Us
    • Contact Us
    • MP Info RSS Feed
    © 2026 ThemeSphere. Designed by ThemeSphere.

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.