Close Menu
    Facebook X (Twitter) Instagram YouTube
    • Home
    • About Us
    • Contact Us
    • MP Info RSS Feed
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Narad Samvad
    • Home
    • देश
    • विदेश
    • राज्य
    • मध्यप्रदेश
      • मध्यप्रदेश जनसंपर्क
    • छत्तीसगढ़
      • छत्तीसगढ़ जनसंपर्क
    • राजनीती
    • धर्म
    • अन्य खबरें
      • मनोरंजन
      • खेल
      • तकनीकी
      • व्यापार
      • करियर
      • लाइफ स्टाइल
    Narad Samvad
    Home»धर्म»इस नदी को पार करना पापियों के लिए मुश्किल, बुरे कर्म के लोगों को देखकर उबलने लगता है इसका पानी
    धर्म

    इस नदी को पार करना पापियों के लिए मुश्किल, बुरे कर्म के लोगों को देखकर उबलने लगता है इसका पानी

    By September 21, 2024No Comments4 Mins Read
    Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr WhatsApp Email Telegram Copy Link
    इस नदी को पार करना पापियों के लिए मुश्किल, बुरे कर्म के लोगों को देखकर उबलने लगता है इसका पानी
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp Pinterest Email

    सनातन धर्म में 18 पुराणों के बारे में बताया गया है. जिसमें अग्नि पुराण, भविष्य पुराण, ब्रह्मवैवर्त पुराण, लिङ्ग पुराण, ब्रह्म पुराण, पद्म पुराण, विष्णु पुराण, वायु पुराण, भागवत पुराण, नारद पुराण, मार्कण्डेय पुराण, वाराह पुराण, स्कन्द पुराण, वामन पुराण, कूर्म पुराण, मत्स्य पुराण, गरुड़ पुराण, ब्रह्माण्ड पुराण शामिल है. पौराणिक मान्यता के मुताबिक ब्रह्म पुराण सबसे प्राचीन पुराण है. मत्स्य पुराण, सनातन धर्म में संस्कृत साहित्य की पुराण शैली में सबसे प्राचीन पुराण है. नारद पुराण में सभी 18 पुराणों के विषय में विस्तार से बताया गया है. गरूण पुराण में ‘वैतरणी नदी’ के बारे में बताया गया है. जो बुरे कर्म करने वालों व्यक्तियों के लिए नरक में बहती हैं.

    गरुड़ पुराण के अनुसार यह ‘वैतरणी नदी’ यमलोक में बहती है और यह खून और मवाद से भरी है. इसकी दूरी करीब 12 लाख किलोमीटर की बताई जाती है. इस नदी में भयानक जीव-जंतु रहते हैं. जैसे कि मांस खाने वाले पक्षी, मछली, कीड़े, मगरमच्छ, और बड़े वज्र जैसी चोंच वाले खतरनाक गिद्ध. अच्छे कर्म करने वालों मनुष्यों को यमलोक में इस नदी को एक टुकड़े में पार करने के लिए नाव दी जाती हैं.

                                                    “क्रोधो वैवस्वतो राजा तृष्णा वैतरणी नदी
                                                    विद्या कामदुधा धेनुः संतोषो नन्दनं वनम्”
    अर्थात्– क्रोध साक्षात् यम है. तृष्णा नरक की ओर​ ले जाने वाली वैतरणी है.
    ज्ञान कामधेनु है. और​ संतोष ही तो नंदनवन है.

    वैतरणी नदी की भयंकर यातनाएं
    पुराणों के अनुसार धरती पर मनुष्यों के द्वारा किए गए पाप से मिलने वाली यातनाएं इस नदी में मिलती हैं पापी आत्माएं मरने के बाद रोते हुए यहां गिरती हैं और भयंकर जीव-जंतुओं से दंशित होकर त्रासित होती हैं. यमलोक के मार्ग पर इस नदी को पार करना पापियों के लिए बहुत मुश्किल होता है. नदी के अंदर पापी आत्माएं जलती हैं. नरभक्षी कीड़े-मकोड़ों और जानवर उनका मांस नोच-नोच कर खाते है. मान्यता है कि इस नदी में मौजूद खून किसी भी पापी आत्मा को देखकर उबलने लगता है और नदी भयंकर लहरों के साथ गर्जना करने लगती हैं.

    नारद पुराण में भी हैं इस नदी का ज्रिक
    इस पुराण के मुताबिक एक बार धर्मराज राजा भगीरथ के दर्शन करने आए थे जो सगर के कुल में जन्में थे जो सातों द्वीप और समुद्रों समेत इस पृथ्वी पर शासन करते थे. राजा भगीरथ ने धर्मराज से कहा. प्रभु आप धर्मों के ज्ञाता हैं. आप समदर्शी भी हैं. मुझ पर कृपा करके बताइए कि यमलोक में कितनी यातनाएं बताई गई हैं और वे किन्हें मिलती हैं? धर्मराज ने बताया कि अधर्म जनित यातनाएं असंख्य कही गई हैं. जिनका दर्शन ही भयंकर है. मैं इसका सक्षिप्त में वर्णन करता हूं. जो लोग महापुरुषों की निंदा करते हैं.जो भगवान शिव और विष्णु से विमुख होकर नास्तिक हैं. वे लोग यमलोक में करोड़ों वर्षों तक नमक का सेवन करते हैं. जो लोग विश्वासघाती, मर्यादा तोड़ने वाले और पराए अन्न के लोभी होते हैं. वे वैतरणी नदी में जाते हैं. इस तरह से धर्मराज ने राजन को यमलोक में दी जानें वाली कई भयंकर यातनाओं के बारे में बताया हैं.

    धर्मशास्त्र में वैतरणी नदी को पार करने के लिए कुछ उपाय
    धर्मिक मान्यताओं के अनुसार मृत्यु के बाद जिन मनुष्यों के परिवार उनके लिए विधिवत कर्मकांड करते हैं. वे हीं इस नदीं को पार करने समर्थ होते हैं. जो सत्कर्म में लगा हुआ हो.उस यत्नपूर्वक दान देना चाहिए. जो दान श्रद्धापूर्वक और भगवान विष्णु के समर्पण पूर्वक दिया गया हो. जो उत्तम पात्र के याचना करने पर दिया गया हो वह दान अत्यन्त उत्तम माना गया है. पितृ पक्ष के दौरान उन 15 दिनों की अवधि में मनुष्य अपने पितरों को श्रद्धापूर्वक स्मरण करते हैं और उनके लिये पिण्डदान करते हैं. उनके हीं पूर्वजों की आत्माएं इस नदी को पार कर पाती हैं बाकी इस नदी में डूब जाती हैं या फिर पार करने के लिए लगातार संघर्ष करती हैं. कहते है लोगों द्वारा दान में दी गई गाय सबसे ज्यादा मूल्यवान होती है. कलयुग में दान देना सबसे बड़ा पुण्य का काम हैं.

    Related Posts

    पंचांग : आज की तिथि में छिपा है अच्छी सेहत का राज! जानें चिकित्सा कार्यों के लिए क्यों है यह सबसे उत्तम दिन

    February 2, 2026

    राशिफल: आज की एक छोटी सी शांति दिलाएगी बड़ी सफलता! जानें सोमवार को आपके भाग्य के सितारे क्या इशारा कर रहे हैं

    February 2, 2026

    पहाड़ों में बर्मा के बिना अधूरा माना जाता है शुभ कार्य, जानें 108 तिनकों से बने देवताओं के इस पवित्र आसन का रहस्य

    February 2, 2026

    जागरण से जागेगा सौभाग्य, भोलेनाथ देंगे मनचाहा वरदान, जानें महाशिवरात्रि की 4 प्रहर पूजा का विशेष फल

    February 2, 2026

    गुमला में यहां 2,000 फीट की ऊंचाई पर बसते हैं बाबा वैद्यनाथेश्वर, रामायण काल से जुड़ी है मान्यता

    February 2, 2026

    गुमला में यहां 2,000 फीट की ऊंचाई पर बसते हैं बाबा वैद्यनाथेश्वर, रामायण काल से जुड़ी है मान्यता

    February 2, 2026
    विज्ञापन
    विज्ञापन
    हमसे जुड़ें
    • Facebook
    • Twitter
    • Pinterest
    • Instagram
    • YouTube
    • Vimeo
    अन्य ख़बरें

    बस्तर की नई पहचान पर्यटन से गढ़ने में मीडिया की महत्वपूर्ण भूमिका : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय……

    August 23, 2026

    महतारी वंदन से सशक्त हो रही छत्तीसगढ़ की मातृशक्ति : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय…..

    August 23, 2026

    छत्तीसगढ़ के बच्चों के हक की एक भी सीट नहीं होगी प्रभावित: स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल….

    August 23, 2026

    तिहारू भी जान गया है, क्या है सुराज, सुशासन तिहार – जनविश्वास, जनकल्याण और विकास की नई पहचान….

    August 23, 2026
    हमारे बारे में

    यह एक हिंदी वेब न्यूज़ पोर्टल है जिसमें ब्रेकिंग न्यूज़ के अलावा राजनीति, प्रशासन, ट्रेंडिंग न्यूज, बॉलीवुड, खेल जगत, लाइफस्टाइल, बिजनेस, सेहत, ब्यूटी, रोजगार तथा टेक्नोलॉजी से संबंधित खबरें पोस्ट की जाती है।

    Disclaimer - समाचार से सम्बंधित किसी भी तरह के विवाद के लिए साइट के कुछ तत्वों में उपयोगकर्ताओं द्वारा प्रस्तुत सामग्री ( समाचार / फोटो / विडियो आदि ) शामिल होगी स्वामी, मुद्रक, प्रकाशक, संपादक इस तरह के सामग्रियों के लिए कोई ज़िम्मेदार नहीं स्वीकार करता है। न्यूज़ पोर्टल में प्रकाशित ऐसी सामग्री के लिए संवाददाता / खबर देने वाला स्वयं जिम्मेदार होगा, स्वामी, मुद्रक, प्रकाशक, संपादक की कोई भी जिम्मेदारी नहीं होगी. सभी विवादों का न्यायक्षेत्र रायपुर होगा

    हमसे सम्पर्क करें
    संपादक - Mohd Amir
    मोबाइल - +91 9111707573
    ईमेल - [email protected]

    कार्यालय

    छत्तीसगढ़ - Chhatrapati Shivaji Ward , Ward No.35 , Jagdalpur - 494001

    मध्यप्रदेश - 11/13, MASJID DOMNI WALI, NEAR MADINA HOTEL, IBRAHIMPURA, BHOPAL, Dist- BHOPAL
    August 2026
    M T W T F S S
     12
    3456789
    10111213141516
    17181920212223
    24252627282930
    31  
    « Jul    
    Facebook X (Twitter) Instagram Pinterest
    • Home
    • About Us
    • Contact Us
    • MP Info RSS Feed
    © 2026 ThemeSphere. Designed by ThemeSphere.

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.