Close Menu
    Facebook X (Twitter) Instagram YouTube
    • Home
    • About Us
    • Contact Us
    • MP Info RSS Feed
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Narad Samvad
    • Home
    • देश
    • विदेश
    • राज्य
    • मध्यप्रदेश
      • मध्यप्रदेश जनसंपर्क
    • छत्तीसगढ़
      • छत्तीसगढ़ जनसंपर्क
    • राजनीती
    • धर्म
    • अन्य खबरें
      • मनोरंजन
      • खेल
      • तकनीकी
      • व्यापार
      • करियर
      • लाइफ स्टाइल
    Narad Samvad
    Home»राज्य»छत्तीसगढ़»प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना से मल्हनिया जलाशय में बदली मछुआरों की जिंदगी, 54 केज में आधुनिक मछली पालन से बढ़ी आय, 44 मछुआरा परिवारों को मिला रोजगार का स्थायी आधार….
    छत्तीसगढ़

    प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना से मल्हनिया जलाशय में बदली मछुआरों की जिंदगी, 54 केज में आधुनिक मछली पालन से बढ़ी आय, 44 मछुआरा परिवारों को मिला रोजगार का स्थायी आधार….

    News DeskBy News DeskSeptember 29, 2026No Comments5 Mins Read
    Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr WhatsApp Email Telegram Copy Link
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp Pinterest Email

    रायपुर: प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केन्द्र सरकार द्वारा मत्स्य क्षेत्र को आधुनिक तकनीक, अधोसंरचना और बेहतर आजीविका के अवसरों से जोड़ने के उद्देश्य से संचालित प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना का प्रभाव अब गांवों तक दिखाई दे रहा है। योजना के अंतर्गत अंतर्देशीय मत्स्यपालन, केज कल्चर और आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा दिया जा रहा है, ताकि मछुआरों और मछली किसानों की आय तथा रोजगार के अवसरों में वृद्धि हो।

    छत्तीसगढ़ के गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के गौरेला विकासखंड स्थित ग्राम देवरगांव का मल्हनिया जलाशय इसका एक उदाहरण बनकर सामने आया है। यहां प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना और जिला खनिज न्यास निधि (डीएमएफटी) के सहयोग से जय बूढ़ा देव मल्हनिया आदिवासी मछुआ सहकारी समिति मर्यादित के सदस्यों ने पारंपरिक मत्स्याखेट के साथ आधुनिक पिंजरा मछली पालन यानी केज कल्चर को अपनाया है। इससे समिति के सदस्यों के लिए मछली उत्पादन, आय और रोजगार का नया आधार तैयार हुआ है।

    54 केज ने बदली आजीविका की तस्वीर
    वर्ष 2002 से संचालित जय बूढ़ा देव मल्हनिया आदिवासी मछुआ सहकारी समिति में वर्तमान में 44 मछुआ आदिवासी सदस्य जुड़े हुए हैं। इनमें 26 सदस्य विशेष पिछड़ी जनजाति (पीवीटीजी) बैगा समुदाय से हैं। पहले समिति के सदस्य मुख्य रूप से जलाशय में पारंपरिक मत्स्याखेट कर मछली बेचकर अपनी आजीविका चलाते थे।

    प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना से मल्हनिया जलाशय में बदली मछुआरों की जिंदगी
    जलाशय की लीज सहित अन्य खर्चों के बाद समिति की वार्षिक आय लगभग ढाई से तीन लाख रुपये तक सीमित थी। मछुआरों की आजीविका को अधिक स्थायी और आय को बेहतर बनाने के उद्देश्य से मत्स्य पालन विभाग एवं जिला प्रशासन ने आधुनिक पिंजरा मछली पालन को बढ़ावा दिया। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना और डीएमएफटी के संयुक्त सहयोग से मल्हनिया जलाशय में कुल 54 केज स्थापित किए गए हैं।

    केन्द्र की योजना, स्थानीय मेहनत और तकनीक का संगम
    प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना का एक प्रमुख उद्देश्य मत्स्य उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाने के साथ मछुआरों एवं मछली किसानों की आय में वृद्धि और रोजगार के अवसर पैदा करना है। योजना में जलाशयों में केज कल्चर सहित अंतर्देशीय मत्स्यपालन को आधुनिक तकनीक से जोड़ने पर विशेष जोर दिया गया है।
    मल्हनिया जलाशय में योजना का यही उद्देश्य स्थानीय स्तर पर साकार होता दिखाई दे रहा है। केज में उन्नत प्रजातियों की मछलियों का पालन किया जा रहा है। पारंपरिक मत्स्याखेट के अनुभव के साथ आधुनिक तकनीक जुड़ने से समिति के सदस्यों को अधिक उत्पादन और बेहतर बाजार अवसर प्राप्त हो रहे हैं।

    एक साल में 10 से 15 लाख रुपये की मछली बिक्री
    केज कल्चर शुरू होने के बाद समिति की आर्थिक गतिविधियों में उल्लेखनीय विस्तार हुआ है। समिति द्वारा एक वर्ष में लगभग 10 से 15 लाख रुपये की मछली का विक्रय किया गया है। वर्तमान में केजों में लगभग 10 से 15 टन मछली उपलब्ध है।

    इस गतिविधि से समिति की आय के साथ-साथ सदस्यों को नियमित रोजगार का अवसर मिल रहा है। समिति के सदस्यों के अनुसार, केज कल्चर से उन्हें प्रतिमाह लगभग 6 से 7 हजार रुपये की आय प्राप्त हो रही है। इससे परिवार की रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने में मदद मिल रही है और आजीविका के लिए केवल पारंपरिक मत्स्याखेट पर निर्भरता कम हुई है।

    मछुआरों के हुनर को मिली आधुनिक तकनीक की ताकत
    मल्हनिया जलाशय की कहानी यह दिखाती है कि जब पारंपरिक आजीविका को आधुनिक तकनीक और संस्थागत सहयोग का साथ मिलता है, तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नए अवसर पैदा हो सकते हैं। वर्षों से जलाशय से जुड़े मछुआरों ने अपने पारंपरिक अनुभव को केज कल्चर की नई तकनीक के साथ जोड़ा है।

    इस बदलाव से मछुआरा समिति की आर्थिक गतिविधियां बढ़ी हैं और सदस्यों को वर्षभर रोजगार से जुड़ने का अवसर मिला है। विशेष रूप से बैगा समुदाय के सदस्यों की भागीदारी इस पहल को आजीविका सशक्तिकरण के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण बनाती है।
    प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के विजन से गांवों तक पहुंची आधुनिक मत्स्य तकनीक

    प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के माध्यम से मत्स्य क्षेत्र में उत्पादन, उत्पादकता, तकनीक, मूल्य श्रृंखला और मछुआरों के सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण को प्रमुखता दी है। योजना के आधिकारिक उद्देश्यों में मत्स्य क्षेत्र की क्षमता का सतत उपयोग, आधुनिक तकनीक का विस्तार, उत्पादन एवं उत्पादकता में वृद्धि, रोजगार सृजन तथा मछुआरों और मछली किसानों की सामाजिक एवं आर्थिक सुरक्षा शामिल है।

    इसी व्यापक दृष्टिकोण का स्थानीय उदाहरण मल्हनिया जलाशय में दिखाई देता है, जहां सरकारी योजना के सहयोग से पारंपरिक मत्स्याखेट को आधुनिक केज कल्चर से जोड़ा गया है। इससे मछली उत्पादन के साथ ग्रामीण परिवारों के लिए आय के अतिरिक्त अवसर तैयार हुए हैं।
    मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में योजनाओं का जमीनी क्रियान्वयन

    केन्द्र सरकार की योजनाओं का वास्तविक लाभ हितग्राहियों तक पहुंचाने में राज्य स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन और स्थानीय प्रशासन की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना को स्थानीय आवश्यकताओं और उपलब्ध संसाधनों के अनुरूप आगे बढ़ाने के प्रयासों का यह उदाहरण सामने आया है।

    मल्हनिया जलाशय में 54 केज की स्थापना, मछुआरा सहकारी समिति की भागीदारी और डीएमएफटी के सहयोग का समन्वय यह दर्शाता है कि केन्द्र की योजना, राज्य स्तर का क्रियान्वयन, जिला प्रशासन का सहयोग और हितग्राहियों की मेहनत मिलकर आजीविका के नए अवसर तैयार कर सकते हैं।

    आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते मछुआरे

    आज मल्हनिया जलाशय के मछुआरों के लिए केज कल्चर केवल मछली पालन की एक नई तकनीक नहीं, बल्कि अपनी पारंपरिक आजीविका को अधिक व्यवस्थित और आय-सृजनकारी बनाने का माध्यम बन गया है। 44 सदस्यों वाली समिति के लिए 54 केज के माध्यम से विकसित यह गतिविधि ग्रामीण अर्थव्यवस्था में रोजगार और आय के नए अवसरों को मजबूत कर रही है।

    मल्हनिया जलाशय में आया यह बदलाव प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की उस व्यापक सोच से जुड़ता है, जिसमें आधुनिक तकनीक, रोजगार और स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग के माध्यम से ग्रामीण परिवारों की आर्थिक क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया गया है। यह सफलता की कहानी बताती है कि सही योजना, तकनीकी सहयोग, स्थानीय प्रशासन की सक्रियता और हितग्राहियों की मेहनत साथ आए तो जलाशय का पानी केवल मछली उत्पादन का साधन नहीं रहता, बल्कि ग्रामीण परिवारों के लिए स्थायी आजीविका और आर्थिक आत्मनिर्भरता का आधार भी बन सकता है।

    News Desk

    Related Posts

    संजू की स्वर्णिम जीत पर उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने थपथपाई पीठ, कहा छत्तीसगढ़ के खिलाड़ियों को मिलेगा उनके अनुभव का लाभ….

    September 29, 2026

    युवा केवल नौकरी मांगने वाले नहीं, रोजगार देने वाले बनें : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय…..

    September 29, 2026

    युवा केवल नौकरी मांगने वाले नहीं, रोजगार देने वाले बनें : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय…..

    September 29, 2026

    ब्रेल पुस्तक से दृष्टिबाधित विद्यार्थियों को कानूनी अधिकारों और शासकीय योजनाओं की मिलेगी जानकारी – राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा…..

    September 29, 2026

    छत्तीसगढ़ राज्योत्सव 2026 की तैयारियों की समीक्षा, 1 से 3 नवम्बर तक आयोजित होगा राज्योत्सव, तैयारियों को समय-सीमा में पूरा करने के निर्देश…..

    September 29, 2026

    सीआईआई एमएसएमई कॉन्क्लेव 2.0 का उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा और उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन ने किया शुभारंभ…

    September 29, 2026
    विज्ञापन
    विज्ञापन
    हमसे जुड़ें
    • Facebook
    • Twitter
    • Pinterest
    • Instagram
    • YouTube
    • Vimeo
    अन्य ख़बरें

    प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना से मल्हनिया जलाशय में बदली मछुआरों की जिंदगी, 54 केज में आधुनिक मछली पालन से बढ़ी आय, 44 मछुआरा परिवारों को मिला रोजगार का स्थायी आधार….

    September 29, 2026

    संजू की स्वर्णिम जीत पर उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने थपथपाई पीठ, कहा छत्तीसगढ़ के खिलाड़ियों को मिलेगा उनके अनुभव का लाभ….

    September 29, 2026

    युवा केवल नौकरी मांगने वाले नहीं, रोजगार देने वाले बनें : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय…..

    September 29, 2026

    युवा केवल नौकरी मांगने वाले नहीं, रोजगार देने वाले बनें : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय…..

    September 29, 2026
    हमारे बारे में

    यह एक हिंदी वेब न्यूज़ पोर्टल है जिसमें ब्रेकिंग न्यूज़ के अलावा राजनीति, प्रशासन, ट्रेंडिंग न्यूज, बॉलीवुड, खेल जगत, लाइफस्टाइल, बिजनेस, सेहत, ब्यूटी, रोजगार तथा टेक्नोलॉजी से संबंधित खबरें पोस्ट की जाती है।

    Disclaimer - समाचार से सम्बंधित किसी भी तरह के विवाद के लिए साइट के कुछ तत्वों में उपयोगकर्ताओं द्वारा प्रस्तुत सामग्री ( समाचार / फोटो / विडियो आदि ) शामिल होगी स्वामी, मुद्रक, प्रकाशक, संपादक इस तरह के सामग्रियों के लिए कोई ज़िम्मेदार नहीं स्वीकार करता है। न्यूज़ पोर्टल में प्रकाशित ऐसी सामग्री के लिए संवाददाता / खबर देने वाला स्वयं जिम्मेदार होगा, स्वामी, मुद्रक, प्रकाशक, संपादक की कोई भी जिम्मेदारी नहीं होगी. सभी विवादों का न्यायक्षेत्र रायपुर होगा

    हमसे सम्पर्क करें
    संपादक - Mohd Amir
    मोबाइल - +91 9111707573
    ईमेल - [email protected]

    कार्यालय

    छत्तीसगढ़ - Chhatrapati Shivaji Ward , Ward No.35 , Jagdalpur - 494001

    मध्यप्रदेश - 11/13, MASJID DOMNI WALI, NEAR MADINA HOTEL, IBRAHIMPURA, BHOPAL, Dist- BHOPAL
    September 2026
    M T W T F S S
     123456
    78910111213
    14151617181920
    21222324252627
    282930  
    « Aug    
    Facebook X (Twitter) Instagram Pinterest
    • Home
    • About Us
    • Contact Us
    • MP Info RSS Feed
    © 2026 ThemeSphere. Designed by ThemeSphere.

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.